Drone for Rural Development

ड्रोन से ग्रामीण विकास

मनोज कुमार अग्रवाल

ड्रोन क्या है, ड्रोन कम्प्यूटर या रिमोट से चलने वाला ऐसा हवाई व्हिकल हैं, जिसमें पायलट नही होता । ड्रोन को अनमैंड एरियल व्हिकल या अनपायलेट व्हिकल भी कहा जाता क्योंकि इसमें पायलट नही होता है । ड्रोन शब्द अंग्रेजी भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ मेल(नर) मधुमक्खी होता है ।

ये हवाई जहाज के छोटे से प्रतिरूप होते हैं, जिन्हें कोई हाथ में रिमोट ले कर उड़ा सकता है । रिमोट के जरिये ही ये दायें से बायें, ऊपर से नीचे, नीचे से ऊपर भी हो जाते हैं ।

आधुनिक ड्रोन को उन्नत कर के ऐसे बना दिया जाता हैं  कि 3 हजार फुट से ज्यादा की ऊंचाई तक उड़ सके । यह समुद्री चक्रवात में भी यह उड़ता रह सकता है । सूचनाएं और चित्र भेजता रहता हैं और यह  80 से 90 घंटे लगातार काम कर सकता हैं । यह बिजली, ईंधन और सौर ऊर्जा से संचालित हो सकता हैं । ड्रोन में कोई चालक नहीं होता हैं । इसे दूर बैठा एक औपरेटर चलाता हैं । ड्रोन के अगले सिरे में बेहद शक्तिशाली कैमरे फिट होते हैं जो काफी ऊंचाई से किसी भी स्थान या सामान की साफ तस्वीर खींच सकते हैं ।

ड्रोन का उपयोग मुख्यतः निगरानी, जासूसी, सैन्य गतिविधियों जैसे मिसाइल ले जाने और हमला करने इत्यादी में किया जाता हैं । इस के अलावा भी इस के बेहद अहम कार्य हैं जिन के लिए भी ये जाने जाते हैं । अगर कोई घने जंगल या ऐसे दुर्गम स्थान में फंस गया हो जहां से उस का ढूंढ़ना मुश्किल हो तो उस की सहायता भी ड्रोन ही करता हैं । भयानक चक्रवात, भूकंप, हवाई सर्वेक्षण आदि में बचाव व राहत कार्य करने के लिए ड्रोन का कोई मुकाबला नहीं हैं । अब ड्रोन का उपयोग विकास के कार्यो में भी किया जाने लगा हैं ।

ड्रोन की उपरोक्त विशेषताओ को देखते हुए यह ग्रामीण एवं कृषि विकास में महत्वपूर्ण साबित हो सकता हैं । खास तोर पर सुदूरवर्ती गांवों में, जहां आसानी से नहीं पहुंचा जा सकता हैं । गांवों में मुख्तया स्वास्थ्य सेवाओं, आधारभूत सरंचनाओ, बिजली, आवागमन के साधनों, आजीविका के साधनों इत्यादी का अभाव रहता हैं इसलिए गाँव का जीवन सुविधाजनक नहीं रहता हैं । और लोग शहरों की और पलायन करते हैं ।

ड्रोन का उपयोग ग्रामीण जीवन को सुविधाजनक बनाने में किया जा सकता हैं जैसे स्वास्थ्य सेवाओं में । दूरस्थ  स्थित गांवों मैं जहाँ ख़राब सड़क और आवागमन के साधनों की कमी की वजह से आसानी से पंहुचा जा ना सके या बाढ़ व अन्य प्राकृतिक आपदाओं के दौरान जहाँ शीघ्रता से स्वास्थ सेवाएँ पहुँचाने हों ड्रोन काफी उपयोगी सिद्ध हो सकता हैं । आपदाओं के दौरान  यह प्रभावितों तक दवाइयाँ व भोजन पहुँचा सकता हैं । बाढ़ के दौरान ये हवाई सर्वेक्षण कर नुकसान का जायजा लेकर बाढ़ से निपटने में सहायता कर सकता हैं ।

ड्रोन का उपयोग खुले में शोच को नियंत्रित करने के बारें में सोचा जा रहा हैं । हाल ही में उत्तर प्रदेश के कानपुर ज़िले के कल्याणपुर ब्लॉक के ख्योरा-कटरी गाँव में खुले में शोच करने वाले लोगों की निगरानी के लिए ड्रोन का ट्रायल किया गया था । अब इसे लागु किया जा रहा हैं ।

ड्रोन का उपयोग नरेगा/ अकाल राहत के अंतर्गत किये जाने वाले कार्यो की निगरानी की जा सकती हैं एवं इसके द्वारा काम में की गई लापरवाही और भ्रष्टाचार को नियंत्रित किया जा सकता हैं ।

वन, जल स्रोत, चारागाह इत्यादी  की निगरानी इसके द्वारा की जा सकती हैं एवं इनके विकास में इसकी मदद ली जा सकती हैं ।

ड्रोन सिचाई प्रबंधन में भी मदद कर सकता हैं । इसके द्वारा नहरों में हुई टूट-फूट का पता लगा कर समय पर उनकी मरम्मत की जा सकती हैं । नहरों से पानी के चोरी की निगरानी का जा सकती है जिससे अंतिम छोर तक के किसानों तक पानी पहुचाया जा सके ।

कृषि कार्यो में ड्रोन का उपयोग निम्न प्रकार से किया जा सकता है –

  • सुरक्षित कीटनाशकों का छिडकाव

फसलों पर कीटनाशकों का छिड़काव जोखिम भरा होता हैं । कीटनाशकों के असर से किसानों को गंभीर बिमारियों से ग्रस्त होने की आशंका रहती हैं । कई बार किसानों की जान भी चली जाती हैं । सबसे ज्यादा मुश्किल गन्ना, ज्वार, बाजरा, अरहर जैसी ऊंचाई वाली फसलों में आती हैं । ड्रोन सभी फसलों पर छिड़काव करने में सक्षम हैं । एक एकड़ के जिस खेत में दो मजदूर दिनभर का समय लेते हैं, वह काम यह ड्रोन केवल आधे घंटे में कर देता हैं । रिचार्ज वाली बैटरी से चलने वाले इन ड्रोन पर छिड़काव के लिए बारह से पंद्रह रूपये का खर्च आता है। एक बार में तकरीबन पांच से सात लीटर कीटनाशकों के साथ ये ड्रोन उड़ान भर सकते हैं।

  • मजदूरों की कमी होने पर

गांवों से शहरों में पलायन व अन्य कई वजहों से खेती के लिए मजदूरों की कमी पड़ने लग गई ऐसे में ड्रोन का उपयोग काफी राहत प्रदान करता हैं । यह कम खर्च में ज्यादा काम कर देता हैं ।

  • अकाल एवं सूखे के दौरान

महाराष्ट्र में सूखा राहत के लिए सूखे का सर्वेक्षण कराने का जिम्मा राज्य सरकार ने ड्रोन्स के हवाले किया हैं । राज्य के उस्मानाबाद जिले में दो ड्रोन की मदद से राज्य सरकार ने ये काम किया और उनके जुटाए आंकड़ों के आधार पर ही किसानों को दिए जाने वाले मुआवजे का निर्धारण किया गया। बाद में राज्य के यवतमाल और औरंगाबाद जिलों में भी ये प्रक्रिया दोहराई गई हैं ।

  • आने वाले तूफान का अनुमान लगाने के लिए

ड्रोन के शक्तिशाली कमरों की मदद से आने वाले तूफान की स्थिति का पता लगा कर होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता हैं ।

  • फसल के पोषण के स्थिति का पता करने के लिए

ड्रोन यह पता लगाने में मदद करता हैं कि किस क्षेत्र में कीटनाशक दवाएं, पानी या उर्वरक का उपयोग जरूरी हैं  और उन्हें वहां पहुंचाता हैं । ड्रोन पता लगाता है कि कहाँ नाइट्रोजन लेवल कम हैं या किस क्षेत्र का विकास कम हुआ हैं ।

उपरोक्त को देखते हुए ड्रोन ग्रामीण विकास में बहुत मददगार सिद्ध हो सकता हैं भविष्य में आवश्यक रूप से इसके द्वारा ली जाने वाली सेवाओं में विस्तार होगा व यह ग्रामीण जीवन की आसान बनाएगा ।

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